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मोगरे की खुशबू .... ओपिडी में आज भीड़ कुछ जियादा ही थी अपनी बारी के इन्तजार में विजिटर बेंच पर बैठे बैठे मैंने सोचा और टाइम पास के लिए मोबाइल खोल कर मैसेज देखने लगा "क्या में यहाँ बैठ सकती हूँ" "जी" मैंने उसे बिना देखे ही जरा सा सरक कर कहा मोबाइल से नजर तब भटकी जब भीनी सी मोगरे की ख़ुशबू के झोंके ने ध्यान अपनी तरफ खींचा ...मोटे तल्ले वाली चप्पल ...करीने से तराशे हुए पैर के नाखूनों पर चम्पई सा नेलपेंट पतली सी पाजेब ...मेचिंग बिछुओं के साथ, फिरोजी रंग के सूट पर छींट का दुपट्टा ...अमलताश की फलियों सी उँगलियों के पोर... और भरी भरी कंपकपाती हथेलियाँ, हथेलियों में पकड़ा हुआ डा. मीनाक्षी अग्रवाल का परचा... तिरछी निगाह से बस इतना ही देख पाया था तब.. लगा ....कहीं तो देखा हैं... पर कहाँ.. मन में कई चित्र चित्र से तैर गए सीने का दर्द कुछ हल्का होता महसूस हुआ, मेरा नंबर पुकारा जा रहा था इसलिए मैं उठा और सीधा डाक्टर के केबिन में घुस गया सामान्य चेकअप के बाद पांच दिन की दवा और फिर दिखाने की एहतियात लिए बाहर निकला वापसी पर निगाह बेंच की तरफ डाली पर शायद उसका भी नंबर आ चुका था प...
कुछ रिश्ते कभी मरते नही हैं रह जाते हैं यादों में बरसती पलकों की एक दो बूंदों में चैन की नींदों भरी रातों के बिसरे हुए ख्वाबो में। कुछ रिश्ते कभी मरते नही गाहे बगाहे कभी जब कभी कोई गीत बज उठता कहीं दर्द सा उठ खड़ा होता वो किसी कहानी का कोई किरदार अनायास ही किसी चेहरे सा आंखों में तिरता रह जाता है कुछ रिश्ते कभी मरते नही। कोई लफ्ज़ किसी पन्ने पर  किसी अखबार की कहानी में किसी छुवन का अहसास दिलाता कोई चेहरा राह चलते कहीं यूँ ही किसी भूले हुए की याद दिलाता कुछ रिश्ते कभी मरा नही करते वो धड़कनों के साथ चला करते हैं।

स्त्री

वो  स्त्री , जो सचमुच तुमसे प्यार करती है तुमको  # छोड़कर जाने का फैसला एक  # पल  में नहीं करती। महीनों वो खुद को समझाती है और जिस दिन वो तुम्हारे बिना खुद को सम्हालना और समझाना सीख जाती है , ठीक उसी पल वो तुमको छोड़कर सिर्फ़ ख़ुद की हो जाती है। तुमको उस दिन से डरना चाहिए जिस दिन स्त्री प्रेम और स्वाभिमान में से , # स्वाभिमान  को चुनती है। क्योंकि उसी दिन स्त्री तुमसे मिले प्रेम को  # हीरे  की तरह दिल में रख लेती है औऱ सारी दुनिया के लिए दिल के दरवाज़े सदा के लिए बंद कर लेती है। ये उसका अंतिम फैसला होता है तुमको छोड़ कर जाने का। स्त्री सहज  # विद्रोही  नहीं होती, विद्रोह करने से पहले वो बार-बार तुमको  # एहसास  कराती है कि " अब पहले जैसा प्रेम महसूस नहीं हो रहा है , प्रेम को कुछ वक्त दिया करो " तुम उसे और उसकी बातों को लापरवाही से टाल देते हो , और एक दिन वो तमाम यादें और प्रेम समेट कर तुमसे  # दूर  चली जाती है। एक बार प्रेम तज कर और प्रेम समेट कर जा चुकी स्त्री कभी पहली सी नहीं रह जाती। तुम्हारे जिस प्रेम ने उसे  # कोम...

बेटियों की विदाई

लम्हा लम्हा यूँ ही कुछ छूट रहा है,सब कुछ जो कल तक अपना था बस कुछ पलों में पराए से हो जाएंगे लगता है ।वो सारी चीजें जिनको किसी को हाथ लगाने भर से चिल्ला दिया जाता था,सहज ही किसी और को दे दिए जाते है । संजोए गए थे जो बड़े ही जतन से कभी उपयोग करने के लिए अब सब बेकार से हो गए है । अपनी दुनिया बदल जाती है पल पल में ...बेटियों की जिंदगी का लम्हा,उनके नजदीक की हर चीज सब धीरे -धीरे छूट रहा होता है । वे लोग जिनसे लड़े बिना दिन पूरा नही होता था,उनके लिए भी अब संकोच पनप रहे होते है । गुस्से को शोर मचा मचा के पूरे घर भर से जाहिर कर देने की आदत पल भर में बदतमीजी लगने लगती है खुद को... कल तक बेपरवाही से जिये गए लम्हे बस यही कही गुम होते जाते है, परवाह होती है अब किसी को कुछ बुरा नही लगने का , न जाने कितनी बार एक-दूसरे का मजाक बनाते बनाते बेमतब दिलों पर चोट कर के हसाँ जाता था,आज मान अपमान के तराजू में तौले जाने लगे .... दुसरो का दिल और अपना दिल दोनो को बचाने की जद्दोजहद में गम्भीरता का लिबास ओढ़ लिया जाता है । छोटी छोटी चीजे जो कल तक यूँ ही जाने दी जाती है,अब ध्यान दिए जाने लगती है । बेटियों क...

वैदिक विवाह अन्य सभी विवाह रीतियों से श्रेष्ठ क्यों??

मैं अपने को विशेषज्ञ तो नहीं मानती लेकिन थोड़ी जिज्ञासु प्रवृत्ति की हूँ ।कोई दिमाग में बात आ जाए तो जब तक पूरा विश्लेषण न कर लूं ,मुझे चैन नही आता ।कुछ दिन पूर्व पिताजी ने प्रश्न किया वैदिक विवाह श्रेष्ठ क्यों है ??संस्कृत की विद्यार्थी हो न तुम ??? प्रमाण सहित उत्तर दो । वो कुछ किरातर्जुनीयम् के रचनाकार कवि भारवि के पिताजी जैसे है । पिताजी की आदत रही है मुझे सवालों में उलझाने की ।हालांकि वो चाहते है हम श्रेष्ठ ही नही सर्वश्रेष्ठ हो । ज्ञान के मामले तो हम लोग पीछे न रहे उनकी इच्छा रहती है ।उनकी इच्छा पूर्ण करने और सवालो के जवाब ढूंढने के लिए विवाह से संबंधित रिसर्च कर रही थी ।कि विवाह एक अनुबंध है कैसे???वैदिक विवाह को सभी विवाह रीतियों से श्रेष्ठ क्यों माना जाता है ???तो हर तरह के विवाह पर रिसर्च कर रही हूं । मैने पाया कि आज का समाज भले ही इन विधियो को ढकोसला मानते हो ,पर वैदिक विवाह में जिस बराबरी का ,समता का अधिकार दिया गया है ।वो अधिकार समता का किसी अन्य रीतियों में नही । चारों वेदों में ऋग्वेद सबसे प्राचीन है । ऋग्वेद के दसवें मंडल का 85 वां सूक्त और अथर्ववेद के 14 ...

लड़कियों के सपनो के राजकुमार अब मोहब्बत नही लाते

लड़कियों के सपनों के राजकुमार अब मोहब्बत लेकर नही आते.. वो आते है दहेज की शर्त पर । सिंदूर की चटक आभा, सुहाग के सब प्रतिचिह्न अब सौभाग्य से नही मिलते... खरीदे जाते हैं । कभी लाखों में... कभी हजारों में... कभी जमीन गिरवी रखकर... कभी मकान गिरवी रखकर ।  रिश्ते अब जुड़ते नही मोलभाव होता है... बिकते है बाजारों में । अब बेटियां सपने नही बुन पाती...  पिता के आंसुओं का बोझ ढोती है... लड़कियों की जिंदगी का सबसे खूबसूरत सपना ... दब जाता दहेज के बोझ तले... और रह जाती है एक कसक..