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Showing posts from June, 2018

बेटियों की विदाई

लम्हा लम्हा यूँ ही कुछ छूट रहा है,सब कुछ जो कल तक अपना था बस कुछ पलों में पराए से हो जाएंगे लगता है ।वो सारी चीजें जिनको किसी को हाथ लगाने भर से चिल्ला दिया जाता था,सहज ही किसी और को दे दिए जाते है । संजोए गए थे जो बड़े ही जतन से कभी उपयोग करने के लिए अब सब बेकार से हो गए है । अपनी दुनिया बदल जाती है पल पल में ...बेटियों की जिंदगी का लम्हा,उनके नजदीक की हर चीज सब धीरे -धीरे छूट रहा होता है । वे लोग जिनसे लड़े बिना दिन पूरा नही होता था,उनके लिए भी अब संकोच पनप रहे होते है । गुस्से को शोर मचा मचा के पूरे घर भर से जाहिर कर देने की आदत पल भर में बदतमीजी लगने लगती है खुद को... कल तक बेपरवाही से जिये गए लम्हे बस यही कही गुम होते जाते है, परवाह होती है अब किसी को कुछ बुरा नही लगने का , न जाने कितनी बार एक-दूसरे का मजाक बनाते बनाते बेमतब दिलों पर चोट कर के हसाँ जाता था,आज मान अपमान के तराजू में तौले जाने लगे .... दुसरो का दिल और अपना दिल दोनो को बचाने की जद्दोजहद में गम्भीरता का लिबास ओढ़ लिया जाता है । छोटी छोटी चीजे जो कल तक यूँ ही जाने दी जाती है,अब ध्यान दिए जाने लगती है । बेटियों क...