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Showing posts from November, 2021

kya galti meri akeli thi

मुझे तो पसंद था संयुक्त परिवार मुझे गांव पसंद था, सबकी मन की करके सबको खुशी देने की अभिलाषा थी ।  मैं गलत नही थी बुरी नही थी ,  शादी के तुरंत बाद से यूं इतना नीचे गिराना क्या सही था ,माना नही आता था मुझे बहुत कुछ...  प्यार के दो बोल से समझाना भी मुश्किल था ।  आक्षेप ,तानों से भरी वाणी क्या मेरा मन छलनी नही हुआ करता था क्या ।  मेरी हर बातों के पीछे का मतलब गलत ही निकाला जाता था ,सही था क्या ।  क्या कसूर था मेरा जो कहा था मुझसे मेरे घर मे मेरे हिसाब से रहना पड़ेगा वरना  चली जाओ यहां से,हाथ पकड़ कर घर से बाहर कर दूंगा तुम्हे ।  ये तुम्हारे नफरत की शुरुआत थी,पहली बार दिल टूटा था ।  तुमने कहा था मेरा परिवार तुमसे खुश नही है छोड़ दूंगा तुम्हे ,तब दिल टूटा था ।  हल्दी ही तो भूले थे उसके पीछे ऐसे अशांति सही थी कि मेरे बोलने पर तुमने मुझपर पहली बार हाथ उठाया ,मेरा पूरा अस्तित्व टूट गया ।  तुम्हारा मुझे छोड़ देना क्या मुझे समझ नही आता क्या ।साथ होकर भी तुम साथ नही होते क्या महसूस नही होता मुझको ।  दूसरे कितना कुछ मुझे कहते रहे वो तुम्हारा पर...