इमारतों पर लिखी इबारतों की तरह तुम ,तुम्हारा नाम,तुम्हारें एक-एक शब्द ,और तुम्हारे पुराने नम्बर से नए नम्बर जो अब न जाने कब से वैध नही है का शोर मचाता है तक सब दिल पर हु-ब-हु उकेर रखा है। तुम कभी मिले तो तुमको इश्क में डूबे कागजों से मिलवाऊंगी ..न जाने कब वो प्रेमपत्र बन बैठी है और धड़कने गजल -to be continue...