Skip to main content

Posts

Showing posts from December, 2021

क्या सिर्फ मायका दोषी

कुछ लोगो को शायद अपनी कहानी लगे ।plz पोस्ट का मतलब न तो किसी को भड़काना है ,न किसी को चोट पहुँचाना । बस इतना ही समझिएगा की अधिकतर लोग अपने व्यवहार पर ध्यान नही देते ।सिर्फ मायके को दोषी बना देते है ।5% करते होंगे ऐसा पर 95% मायका अपनी बेटी को खुश देखना चाहता है,वो उसका घर नही बिगाड़ते ,अब सुरक्षा न दे मरने के लिए नही छोड़ सकते ।ससुराल वाले बहुत से ऐसे है जिनके पास बहुत ऑप्शन होता है ,वो बहु को मार भी देते है । तो महराज सिर्फ मायके को न दोष दे ,बेटे का घर -गृहस्थी उजाड़ने में बेटे की माँ का भी बहुत बड़ा रोल होता है ।40% सास बहू को गृहस्थी सिखाने में सच मे परेशान होती है ,उन्हें हो सकता है बुरा समझ लिया जाए पर वो बहु- बेटे के बीच नही आती ।छोटी छोटी बात पर बेटे का कान भरती ।खुद को प्रताड़ित मां का रोल नही अदा करती । पर 60% सास बेटे को खोने के डर से,बहु के पल्ले से बंधने के डर से,अपने कुर्सी के डर से  बहुत हद तक नीचे गिर जाती है । कुछ  बहुत ही आदर्श बेटे,परिवार परिवार करने वाले खुद के सास -ससुर को गाली भी दे लेंगे मारने पीटने की बात भी कर लेते है ।खुद के परिवार में कोई बिना गाली दिए बात...

उठो

बस बहुत हुआ शिकायतों का ये अम्बार निकाल फेको मन के अब सारे गुबार जो हारे है वो वक़्त को दोषी कहते है  जीतने वाले जीत की बोली रखते है  योद्धा कभी परिस्थिति से कब घबराया  अपने बल पर समय को भी अपना दास बनाया । ©purnima

मैं नारी हूँ

नारी हूँ समर्पण की प्रतिमूर्ति तुम मुझे कमजोर समझ न लेना हस्ती ऊँची है , हृदय से पृथ्वी हूँ प्रेम का सागर हूँ क्रोध में ज्वालामुखी इतना आसान नही है नारी देखो कमजोर समझने की भूल ना करना । रचनाकार-पूर्णिमा मिश्रा

kyu

नौकरी वाली बहु के लालच ने आपको कितना भरमाया था, अपने ही बेटे  के जीवन से खिलवाड़ रचाया था । मैं तो परायी थी मेरे साथ गलत तो समझ आता है, किस स्वार्थ ने आपसे आपके बेटे का सर कटाया था । मेरी पिता की बातों में मेरे पढ़े लिखे होने का गुरूर था है रहेगा । फिर आज उनकी बातों ने  आपको  क्यूं जलाया है । मेरी मां ने कहा तो था कि बहुत बोलती हूँ मैं आपने स्वीकार वही किया, फिर शादी होते ही मेरे बोलने का आपने तमाशा बनाया था । कहा था मेरे भाई ने बात बर्दास्त नही होती इससे जवाब देती है, उस कमी को भी पहले आपने गले लगाया था, फिर शादी होते ही क्यों सफाई देने को उल्टा जवाब बताकर मेरे पति को मेरे खिलाफ खड़ा कराया था । कहा था मेरी मां ने सिर्फ पढ़ाया है,काम नही करवाया उस वक्त अपनाकर क्यों शादी होते ही काम को लेकर इतना तमाशा करवाया था । मुझे लुसेंट,घटनाचक्र,सोशल वर्क,न्याय,से सर फुड़वाया था , sdm कलेक्टर बनाने का उन्होंने सपना पाला था । सीधी शादी सब चुपचाप सहने वाली नही थी ये सब आपको पहले ही बताया था ।तो फिर मुझपर क्यों हाथ उठवाया था । फिर क्यों आज शादी को हम दोनों की बर्बादी बनाया...