उठो December 26, 2021 बस बहुत हुआ शिकायतों का ये अम्बारनिकाल फेको मन के अब सारे गुबारजो हारे है वो वक़्त को दोषी कहते है जीतने वाले जीत की बोली रखते है योद्धा कभी परिस्थिति से कब घबराया अपने बल पर समय को भी अपना दास बनाया ।©purnima Share Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Share Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
शंकर बनो January 14, 2022 ईश्वर की आराधना उनसे मांगने के लिए नही की जाती,वरण करने के लिए की जाती है,उस देवत्व को पाने के लिए की जाती है । सब शंकर के भक्त है ,शंकर बनना कोई नही चाहता । शंकर के गले मे विषधर है (धोखे का ,फरेब का,नीचा दिखाने का),।गले मे कालकूट विष जब्त है(अपमान का) जिसे नीचे नही उतरने दिया हृदय से नही लगाया ।कानों में बिच्छू है(ताने,उलाहने,व्यंगों का डंक) । फिर भी माथे पर (दिमाग मे)असीम शांति और शीतलता का चंद्रमा है । सर पर गंगा है (पवित्रता है)। हृदय पवित्र है,निष्पाप है ,निष्कलंक है । आपको किसी ने दुःख दिया है ,चोट पहुँचाया है ।नही भूल पा रहे है ।माफ नही कर पा रहे है ।आपने अपने सर पर जहर का बोझ रखा है । बोझ उतारिए ,माफ करिए ..समझिए वो मानसिक रूप से बहुत बीमार है,उनपर तरस खाईए ।उनपर आपसे कही ज्यादा जहर का बोझ है ।वो माफ नही कर पा रहे,जहर बांट रहे है कि शांति मिले ।अब ऐसे बीमार इंसान से आप चोटिल हो गए तो उनके संस्कार के भागीदार हो गए ,उनके कर्म के साझीदार हो गए । ©Purnima Mishra Read more
मैं नारी हूँ December 21, 2021 नारी हूँ समर्पण की प्रतिमूर्ति तुम मुझे कमजोर समझ न लेना हस्ती ऊँची है , हृदय से पृथ्वी हूँ प्रेम का सागर हूँ क्रोध में ज्वालामुखी इतना आसान नही है नारी देखो कमजोर समझने की भूल ना करना । रचनाकार-पूर्णिमा मिश्रा Read more
समझौता January 06, 2022 मेरी समझौते की जिंदगी में थोड़े पल का हठ किया, इस बार नही ,इस बार नही,कहकर खुद से छल किया था । जो एक बार समझौता करता है,उसे हर बार करनी पड़ती है, मालूम था मुझे फिर भी ,बदलने का मैंने एक भ्रम किया था । समझौता नियति है मेरी तो मेरी नियति ही सही । आखिरी समझौता अब मैंने अपने आप से किया है । जीवन से लड़ना नही है अब मुझको, जो साथ है मेरे उसपर ही अब अभिमान किया है । मैं बेहतर थी,बेहतर हूँ, बेहतर रहूंगी , किसी और के प्रमाणपत्र पर जीवन का फलसफा नही रखूंगी । मेरे शहर में खुशियां है,किसी और कि मोहब्बत की बेरुखी से अपना शहर नही उजाड़ करूँगी । मुझे रब ने जो बख्सा है वही नियामत काफी है । मैं 'पूर्ण' हूँ खुद से ही बेइंतहा प्यार करूँगी,जियूंगी हरपल,मौत को भी शर्मसार करूँगी । कोई शिकायत नही किसी से अब ,आखिरी मुलाकात समझ कर सबको माफ करूँगी । जैसे खुद को माफ करके फिर मुस्कुराती हूँ, गैरों के दिल दुखाने पर उनको भी ऐसे ही माफ करूँगी । ©purnima mishra Read more
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