प्रिय तुम भी फागुन लाते , प्रेम के रंग में रंग मुझे जाते । बरसों किए इंतजार पिया, मन तुम भी मेरा सावन के जाते । एक ही रंग हम तुम रंग जाते , इश्क अगर तुम हमसे कर पाते । गले लगा लो ,प्रेम से प्रियतम मेरे होकर मुझे होली कर जाते । Purnima Acharya M.A. hindi ,sanskrit B.ed. Ctet,Ntt
परिवार में अनुशासन होना चाहिए ,शासन नही । जहाँ शासन परिवार के बीच है वहां महाभारत है । जहां शासन परिवार से बाहर के लिए है ,वहां चक्रवर्ती सम्राट है । जहां परिवार के लिए है वहां कुरुक्षेत्र है । परिवार के प्रत्येक व्यक्ति की अपनी अपनी मर्यादा है,प्रत्येक रिश्तों की अपनी अपनी मर्यादा है । जब कोई अपनी मर्यादा को लांघ कर दूसरे की मर्यादा में घुसने की कोशिश करता है ,किसी रिश्ते की मर्यादा में घुसता है । वही महाभारत है ,वही क्लेश है ।एक भी कड़ी अगर टूट रही है तो समझ लीजिए कि आपमें परिवार चलाने का हुनर नही है । रहने वाले तो एक ही घर मे ,एक ही छत के नीचे एक ही रसोई में एक साथ कितनी पीढिया रह लेते है,सब खुश रहते है,शिकायते इनके घरों में नही होती ।नमन ऐसे परिवारो को । मजे की बात है कि इस घर मे किसी की निंदा नही मिलती है । क्या इस घर मे सब के सब अच्छे लोग आते है कितने कितने घरों की बेटियां,कितने कितने संस्कार ,सब एक जैसी तो बेशक नही होती ,कोई सीधा है कोई तेज है ,कोई कुछ है,कोई कुछ है ।ऐसे घर को चलाते है उस घर के बड़े, बुजुर्ग । 1- सब अपनी अपनी मर्यादा का पा...