ईश्वर की आराधना उनसे मांगने के लिए नही की जाती,वरण करने के लिए की जाती है,उस देवत्व को पाने के लिए की जाती है । सब शंकर के भक्त है ,शंकर बनना कोई नही चाहता । शंकर के गले मे विषधर है (धोखे का ,फरेब का,नीचा दिखाने का),।गले मे कालकूट विष जब्त है(अपमान का) जिसे नीचे नही उतरने दिया हृदय से नही लगाया ।कानों में बिच्छू है(ताने,उलाहने,व्यंगों का डंक) । फिर भी माथे पर (दिमाग मे)असीम शांति और शीतलता का चंद्रमा है । सर पर गंगा है (पवित्रता है)। हृदय पवित्र है,निष्पाप है ,निष्कलंक है । आपको किसी ने दुःख दिया है ,चोट पहुँचाया है ।नही भूल पा रहे है ।माफ नही कर पा रहे है ।आपने अपने सर पर जहर का बोझ रखा है । बोझ उतारिए ,माफ करिए ..समझिए वो मानसिक रूप से बहुत बीमार है,उनपर तरस खाईए ।उनपर आपसे कही ज्यादा जहर का बोझ है ।वो माफ नही कर पा रहे,जहर बांट रहे है कि शांति मिले ।अब ऐसे बीमार इंसान से आप चोटिल हो गए तो उनके संस्कार के भागीदार हो गए ,उनके कर्म के साझीदार हो गए । ©Purnima Mishra
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